सभी भारतीय मेरे हैं, अपने हैं । मेरा जीवन सभी भारतीयों के लिए है । मेरा जीवन भारतवासियों की रक्षा, उत्थान व मंगल के लिए है । मेरे लिए जाति, धर्म, मजहब, संप्रदाय के मायने बाद में है, पहले हर भारतवासी नागरिक मेरे अपने देश का नागरिक है । मैं हर भारतीय से प्रेम, स्नेह रखता हूँ और भारत के हित के लिए उनसे काम करने, अपनी योग्यताओं का सदुपयोग करने की आशा अपेक्षा रखता हूँ !

मैं कहना चाहता हूँ कि सुमति को पकड़े रखो, संपत्ति अपने आप आयेगी । सुबुद्धि से अपनी योग्यता और ताकत को देशवासियों की, समाज की सेवा में हम नियोजित करें । दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझें । दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझें । अपने कर्तव्य का पालन करें । दूसरों के अधिकारों की रक्षा करें । न्याय प्रेमी बनें । न अन्याय करें, न अन्याय को सहें । अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए सुबुद्धि से अपनी जन्मभूमि के लिए जीवन समर्पित करें । संपत्ति तो अपने आप पीछे आयेगी । संपत्ति के लिए जीवन समर्पित करनेवाले बहुत होंगे, परंतु मुझे तो सुबुद्धि को महत्त्व देनेवाले सद्गुणी लोगों की जरुरत है । मुझे तो ऐसे लोग चाहिए जो अपना तन-मन-धन जनता जनार्दन की सेवा में समर्पित कर सकें ! 

आओ महान व्यक्तियों के विचारों व सिद्धांतों को अपनाकर भारत को विश्व की महाशक्ति बनायें । देश की दशा और दिशा को बदलें ।

 

Leave comments

Your email is safe with us.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.