भगवान का नाम, गुरु का मंत्र साथ देता है !
भगवान का नाम, गुरु का मंत्र साथ देता है । (पू. श्री नारायण साँईं जी के सत्संग प्रवचन से ) भगवान का नाम, गुरु का मंत्र साथ निभाता है, बैंक बैलेंस साथ नहीं निभाता है । जय रामजी की... वो FD तो धरी की धरी रह जाएगी । वो बॉन्ड फंड सब पड़े के पड़े [...]
सद्गुरु की कृपा से जिनको ज्ञान की आँख प्राप्त है, वे देखते हैं !
सद्गुरु की कृपा से जिनको ज्ञान की आँख प्राप्त है, वे देखते हैं ! (अनंत विभूषित स्वामी श्री अखंडानंद सरस्वतीजी महाराज के 'आनंदरस रत्नाकर' सत्-साहित्य से संकलित साभार) उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुझ्जानं वा गुणान्वितम् । विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुष: ।। (भगवद्गीता 15.10) 'शरीर से निकलते हुए, शरीर में रहते हुए और गुणों से सम्बद्ध होकर [...]
साँई संदेश : खास बात…
खास बात… आज कुछ खास बात लिख रहा हूँ, जिसे समझने की जरूरत है । देखो, अपनी वर्तमान परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, अच्छी-बुरी, लेकिन उसे दोष दिए बिना या किस्मत की लकड़ी पर टिके रहकर वर्तमान क्षणों को बर्बाद ना करें । मिली हुई प्रत्येक क्षण - हरेक क्षण - पल का जितना हो [...]
Chaturmas Niyam
चतुर्मास व्रत चतुर्मास में भगवान नारायण एक रूप में तो राजा बलि के पास रहते हैं और दूसरे रूप में शेष शय्या पर शयन करते हैं, अपने योग स्वभाव में, शांत स्वभाव में, ब्रह्मानंद स्वभाव में रहते हैं। अतः इन दिनों में किया हुआ जप, संयम, दान, उपवास, मौन विशेष हितकारी, पुण्यदायी, साफल्यदायी है। भगवान शेषशय्या [...]
साँई संदेश : सफल वही होते हैं !
सफल वही होते हैं जो सकारात्मक सोच रखते हैं। छोटी-छोटी बातों में भी आनंद खोजना चाहिये। अपने बचपन को याद करो, कितनी छोटी बातों से खुश हो जाया करते थे। पर अब तनाव में घिरे रहते हैं। कभी बालक जैसा सहज बन सकें तो आनंद ही आनंद.. हर हाल में...
दिल के लिए प्राकृतिक बूस्टर है भ्रामरी प्राणायाम
दिल के लिए प्राकृतिक बूस्टर है भ्रामरी प्राणायाम ! शोध में सामने आए हृदय स्वास्थ्य से जुड़े सकारात्मक परिणाम आज की तेज़-रफ़्तार जीवनशैली, तनाव, अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खान-पान के कारण हृदय रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोग हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अनेक उपाय अपनाते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित [...]
मन एक कल्पवृक्ष !
मन एक कल्पवृक्ष... हमारा मन ही एक कल्पवृक्ष है । हम जैसा सोचते हैं, वैसा बन जाते हैं । तो भावना करें कि हम आनंद, शांति, धीरता, वीरता इस वायुमण्डल से अपने भीतर भर रहे हैं और हमारे भीतर जो अशांति है, उद्वेग है, दीनता-हीनता के विचार हैं, वे बाहर जानेवाले श्वास के साथ खाली [...]
परमात्मप्राप्ति सरल है ! (त्वमेकं शरण्यं)
परमात्मप्राप्ति सरल है ! (पूज्य साँईंजी के ‘त्वमेकं शरण्यं’ सत्-साहित्य से संकलित) परमात्मा की प्राप्ति वास्तव में बहुत सरल है और यह साधन कृपा के बल से, पुरूषार्थ से या परिश्रम से नहीं बल्कि उन्हीं की कृपा से होती है । चींटी अगर गरूड़ से मिलना चाहे तो कठिन है, इस जन्म में वो मिल [...]