मन एक कल्पवृक्ष !
मन एक कल्पवृक्ष... हमारा मन ही एक कल्पवृक्ष है । हम जैसा सोचते हैं, वैसा बन जाते हैं । तो भावना करें कि हम आनंद, शांति, धीरता, वीरता इस वायुमण्डल से अपने भीतर भर रहे हैं और हमारे भीतर जो अशांति है, उद्वेग है, दीनता-हीनता के विचार हैं, वे बाहर जानेवाले श्वास के साथ खाली [...]
परमात्मप्राप्ति सरल है ! (त्वमेकं शरण्यं)
परमात्मप्राप्ति सरल है ! (पूज्य साँईंजी के ‘त्वमेकं शरण्यं’ सत्-साहित्य से संकलित) परमात्मा की प्राप्ति वास्तव में बहुत सरल है और यह साधन कृपा के बल से, पुरूषार्थ से या परिश्रम से नहीं बल्कि उन्हीं की कृपा से होती है । चींटी अगर गरूड़ से मिलना चाहे तो कठिन है, इस जन्म में वो मिल [...]