खुशहाल जिंदगी के समर्थक – श्री गणेश - नारायण साँईं 'श्री गणेशाय नमः' के साथ गणपति गजानन बप्पा का मंगलमय स्मरण करते हुए विश्व के तमाम मनुष्यों को गणेश उत्सव के अवसर पर मैं हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ प्रदान करता हूँ । भारत में करीब 70-75 साल पहले स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक [...]
भगवान गणपति पूजन की महिमा एवं विधि... भगवान गणपति का उत्सव देश और विदेश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । 'गणपति बप्पा मोरया, लाड़ू लाओ लवकरया ।' इस प्रकार गणपति बप्पा के भक्त रिद्धि और सिद्धि की प्राप्ति के लिए, बुद्धि को सूक्ष्म बनाने के लिए और अपने जीवन मार्ग में आनेवाले [...]
मंडला कला ! मैं आपको मंडला कला के बारे में बताना चाहता हूँ । क्या आप इस बारे में जानते हैं? मंडला कला सिर्फ़ जटिल पैटर्न वाली रंग भरने वाली कला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा तरीका है जिसके ज़रिए इस दुनिया में कुछ लोग, जो काम और जीवन के तनाव के बीच जूझ [...]
उत्सव और त्यौहारों पर लोग एक-दूसरे को कुछ-न-कुछ भेंट देते हैं । परंतु भेंट देने का भी एक विज्ञान है । स्वीकार करनेवाले को आश्चर्य हो ऐसी नहीं लेकिन उसे उपयोगी हो ऐसी भेंट देनी चाहिये । अगर भेंट आपको स्वयं को स्वीकार करनी हो तो आप क्या पसंद करेंगे इस विचार के आधार पर [...]
ॐ और जीवनचक्र का अद्भुत संयोजन ! ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।। इसका अर्थ है : ॐ अर्थात परमात्मा पूर्ण है, यह जगत भी पूर्ण है । उस पूर्ण से यह पूर्ण आत्मा उत्पन्न होती है । पूर्ण से पूर्ण निकालने पर भी जो बचता है वह भी पूर्ण ही [...]
अगर आप अकेला महसूस करते हैं तो पढ़ें साँईं जी के अनमोल वचन जो दूर करेंगे आपका अकेलापन ! WHO की रिपोर्ट : दुनिया का हर चौथा इंसान अकेला, महामारी बना अकेलापन ! अगर आप अकेले हो गए तो फिक्र मत करो… क्योंकि अकेलापन आपके स्पीरिट को जगाने की साइंटिफिक पद्धति है… ईश्वर के साथ [...]
रक्षाबंधन' पर्वोत्सव मनाइये, पवित्र संबंधों को मजबूत बनाइये । भारतीय संस्कृति का यह पर्व है पवित्रता का, प्रेम का, आत्मीयता का और भाई-बहन के संबंधों के पुण्य स्मरण का । बहन की सुरक्षा का, भाई की उन्नति का, सद्भाव का और परस्पर स्नेह की अनुभूति का ! भाई और बहन, भाई और भाई, पिता और [...]
हृदय महाधन है, उसकी रक्षा करनी चाहिए ! (पूज्य साँईंजी के ‘ज्योत से ज्योत जगाओ’ नामक सत्-साहित्य से संकलित) सत्शिष्य के हृदय से निकले उद्गार हैं ये ! – ‘सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ...’ जब अंदर की ज्योत जग जाती है, तो बाहर की ज्योत फीकी हो जाती है । जिसकी वह अंदर की ज्योत [...]
मैं संपूर्ण आदर और श्रद्धा के साथ मेरे मार्गदर्शक, आचार्य, सद्गुरु को मैं विश्व में जहाँ भी रहूँ, वहीँ से प्रणाम करता हूँ | जो कुछ दोष हैं वे मेरे हैं और जो कुछ भी मेरे जीवन में सद्गुण हैं, अच्छाइयाँ हैं, वो सब उनकी तरफ से मिली हैं | मेरे जीवन की श्रेष्ठता के [...]
सभी गुरुभाई एवँ गुरुबहनें गुरुपूनम के पावन पर्व पर अपने-अपने घरों में सद्गुरुदेव का विधिवत पूजन अथवा मानसिक पूजन अवश्य करें । ब्रह्ममुहूर्त में उठने का प्रयास करें । स्नान करके प्रातः साधना में बैठें । कम-से-कम २-३ घंटे तक गुरुदेव का ध्यान करें । उसके बाद सद्गुरुदेव मानसिक पूजन करें । अपने सामर्थ्य अनुसार [...]
भगवान का नाम, गुरु का मंत्र साथ देता है । (पू. श्री नारायण साँईं जी के सत्संग प्रवचन से ) भगवान का नाम, गुरु का मंत्र साथ निभाता है, बैंक बैलेंस साथ नहीं निभाता है । जय रामजी की... वो FD तो धरी की धरी रह जाएगी । वो बॉन्ड फंड सब पड़े के पड़े [...]
सद्गुरु की कृपा से जिनको ज्ञान की आँख प्राप्त है, वे देखते हैं ! (अनंत विभूषित स्वामी श्री अखंडानंद सरस्वतीजी महाराज के 'आनंदरस रत्नाकर' सत्-साहित्य से संकलित साभार) उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुझ्जानं वा गुणान्वितम् । विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुष: ।। (भगवद्गीता 15.10) 'शरीर से निकलते हुए, शरीर में रहते हुए और गुणों से सम्बद्ध होकर [...]
खास बात… आज कुछ खास बात लिख रहा हूँ, जिसे समझने की जरूरत है । देखो, अपनी वर्तमान परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, अच्छी-बुरी, लेकिन उसे दोष दिए बिना या किस्मत की लकड़ी पर टिके रहकर वर्तमान क्षणों को बर्बाद ना करें । मिली हुई प्रत्येक क्षण - हरेक क्षण - पल का जितना हो [...]
चतुर्मास व्रत चतुर्मास में भगवान नारायण एक रूप में तो राजा बलि के पास रहते हैं और दूसरे रूप में शेष शय्या पर शयन करते हैं, अपने योग स्वभाव में, शांत स्वभाव में, ब्रह्मानंद स्वभाव में रहते हैं। अतः इन दिनों में किया हुआ जप, संयम, दान, उपवास, मौन विशेष हितकारी, पुण्यदायी, साफल्यदायी है। भगवान शेषशय्या [...]
सफल वही होते हैं जो सकारात्मक सोच रखते हैं। छोटी-छोटी बातों में भी आनंद खोजना चाहिये। अपने बचपन को याद करो, कितनी छोटी बातों से खुश हो जाया करते थे। पर अब तनाव में घिरे रहते हैं। कभी बालक जैसा सहज बन सकें तो आनंद ही आनंद.. हर हाल में...