जीवन में सकारात्मकता लाएँ !
आपकी अपेक्षाएँ, आपकी भावनाएँ, आपकी इच्छाएँ, आकांक्षाएँ क्या आपके जीवन से बड़ी हैं ? जरा सोचिये !
अगर ऐसा होता तो आत्महत्या के बाद भी सुकून शांति क्यों नहीं मिलती ? इसका उत्तर है – आपका जीवन सबसे अनमोल है । किसी ऐसे कारणों से हताश-निराश होकर इस अमृततुल्य जीवन को नष्ट ना करें ।
क्योंकि आप जीवित होंगे तो अपने टूटे हुए सपनों को फिर से साकार कर पाएँगे । यदि आप जीवित होंगे तो फिर-फिर से आगे बढ़ पाएँगे ।
आप डिप्रेशन में हैं तो घबराएँ नहीं । अपने आपको समझने की कोशिश करें कि डिप्रेशन कब आता है ? क्यों आता है ?
१) जब अपनी इच्छा के विरुद्ध, किसीके द्वरा आप प्रताड़ित होते हैं, तब आप negative हो जाते हैं । उस समय विचार करें कि आपके भीतर एक ऐसी शक्ति है, जो पॉजिटिव है और जो आपके सभी क्रियाओं को देख रही है । वह पॉजिटिव एनर्जी सभी प्रकार की नकारात्मकता से लड़ने हेतु सक्षम है । और आप थोड़े ही दिनों में देखेंगे कि आपका कॉन्फिडेंस (आत्मबल) बढ़ रहा है । आपके भीतर भरपूर positivity (सकारात्मकता) उत्पन्न हुई है । इसके लिए आप ध्यान का आश्रय लें ।
२) डिप्रेशन तब आता है, जब आपको कोई अपना नहीं समझता, तब अनेकों विचार, नकारात्मकता आपके भीतर प्रवेश करती है । ऐसे समय में आप positive रहने का तो सोच भी नहीं सकते, तो क्या करें ? आप किसी motivational person का सपोर्ट लें ना कि दवाइयों का, क्योंकि दवाईयाँ आपके मस्तिष्क को केवल सुन्न करती हैं और जब आप दवाईयाँ बंद करते हैं, तब आप उन्हीं विचारों के अंधकार में धकेले जाते हैं । इसलिए आप योग, ध्यान, सकारात्मक विचार, ज्यादा से ज्यादा motivational speech (प्रेरणास्पद वचनों) का अवलंबन लें । आप थोड़े ही दिनों में अपने भीतर सभी परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति महसूस करने लगेंगे ।
३) डिप्रेशन तब आता है, जब आपके स्वप्न, इच्छाएँ पूर्ण होते नजर नहीं आते, तब आपका मस्तिष्क ‘नहीं’ शब्द को स्वीकार करता है और आपको नकारात्मकता से भर देता है । ऐसे समय में आपको अपने भी पराये लगने लगते हैं । आप उन्हीं उलझनों में उलझकर स्वयं से भी दूर हो जाते हैं, तब क्या करें ?
तब आप कितने भी प्रतिभाशाली या बड़े व्यक्ति हों, अपने परिवार के लिए छोटे बन जाएँ । उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएँ । अपने विचार उनके आगे प्रकट करें और अपने स्वप्न, इच्छाएँ उन्हें बताएँ । वो किस प्रकार पूर्ण नहीं हो पा रहे, वह भी बताएँ, तो परिवार से भी आपको प्रेम, सहानुभूति प्राप्त होगी, जो आपका बल बनेगी । एकांत में कम से कम समय रहें, जब आप डिप्रेशन में हों तब । अपने कमरे में किसी भी अपने परिवार के एकाध व्यक्ति को साथ में रखें, जिससे आपका मन सकारात्मक रह सके ।
४) डिप्रेशन तब आता है, जब आपको कोई मार्ग नहीं सूझता या जीवन असार लगता है । तो हिम्मत नहीं हारें आप ? अथाह बल, सामर्थ्य, आत्मविश्वास है आपके भीतर, परंतु जब आप स्वयं से मिलने के बजाय औरों द्वारा दी गई परिस्थितियों पर या टूटते स्वप्नों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, तब आप बिखर जाते हैं ।
ऐसे कठिन समय में आपको अपने अथाह बल का प्रयोग करना है । जब-जब आपको सफलता प्राप्त हुई थी, तब-तब आपने उसे कैसे प्राप्त किया था, वह सोचें । क्योंकि दुनिया में कोई आपको मार्ग से हटाने के लिए पत्थर, कंकड़ डाल सकता है, मार्ग भी बंद कर सकता है, परंतु दूसरा मार्ग बनाने से कोई नहीं रोक सकता । आप अपने स्वप्नों को पूर्ण करने का अन्य रास्ता खोजें, अवश्य सफल होंगे । क्योंकि आप नित्य कुछ नया चाहते हैं, कोई भी व्यक्ति एक ही तरीके से जीना नहीं चाहता । तो आप अपनी अपेक्षापूर्ति के लिए एक ही मार्ग ना पकड़ें । नित्य कुछ नया करें, तो व्यक्ति, परिस्थितियों की मुश्किलें आपके जीवन से हटने लगेंगी । आप स्वयं को और भी मजबूत, सहनशील, प्रतिभाशाली बनता हुआ महसूस करेंगे ।
५) आप कोई भी पद पर हों, किंतु सबसे पहले एक मनुष्य हैं, यह स्मरण रखें । और पहले कितनी भी सफलता मिली हो और अब असफलता मिल रही हो, तो सबसे पहले अध्यात्म का आश्रय लें । पूजा-पाठ को अध्यात्म नहीं कहते बल्कि अपने आसपास positive विचार, हिम्मत, धैर्य, negative विचारों से लड़ने की ताकत, अपने को औरों के दृष्टिकोण से न देखने की हिम्मत को अध्यात्म कहते हैं । अपने आप में अथाह सामर्थ्य, उर्जावान महसूस करने को अध्यात्म कहते हैं । आप अपने कमरे को जहाँ आप ज्यादा रहते हैं, स्वच्छ रखें, वहाँ किसी भगवान या आप जिस किसी धर्म के हों, जिन्हें मानते हों, उनकी तस्वीर रखें । अपने कमरे में मृत व्यक्तियों की फोटो न लगाएँ । संत, भगवान की चलेगी । धूप, अगरबत्ती और दीपक रोज जलाएँ । प्रार्थना करें कि आपको बल और हिम्मत मिले । थोड़ी देर आँख बंद करके अपने आप में खो जाएँ । सब कुछ बाहर का भूलकर । सुबह-शाम, सोने से पूर्व आप कितने भी व्यस्त हों किंतु motivational song, भजन, स्पीच सुनते हुए सोएँ और उठें । देखिये आपको कितना चमत्कारिक लाभ प्राप्त होगा और आपकी इच्छाएँ पूर्ण हों या न हों, यह आपको आपके जीवन से महत्त्वपूर्ण नहीं लगेंगी । आपकी जीने की चाह बढ़ेगी । आप strong (मजबूत) बनेंगे ।
६) मनुष्य आत्महत्या तब करता है, जब उसे स्वयं से अधिक, जीवन से अधिक स्वप्न, इच्छापूर्ति बड़ी लगती है । उसका मन-मस्तिष्क कुछ भी समझने, सहने के योग्य नहीं रहता । कई बार व्यक्ति अपने मन से युद्ध करता है, भीतर ही भीतर जीवन-मृत्यु की लड़ाई चलती रहती है और एक दिन ऐसा आता है कि युद्ध में मनुष्य हार जाता है । तब यह नकारात्मक घटना घटती है । जरा विचार कीजिये, आप जीवित रहेंगे तो स्वप्न भी पूर्ण होंगे । परिवार भी खुश रहेगा । आज जो आपको कष्ट, पीड़ा या बाधा दे रहें हैं, कल वे भी आपकी सफलता को प्रणाम करेंगे । परंतु यह तब संभव होगा जब आप बिना हारे, बिना थके, बिना डरे, हर परिस्थिति को झेलकर उससे पसार होंगे । उस पर विजय प्राप्त करेंगे तो आनेवाला कल आपका होगा ।
किसी भी घटना, हार का उपाय मृत्यु नहीं हो सकती, क्योंकि मरने के बाद भी वह आपकी पीड़ा को नहीं मिटाती बल्कि केवल आपको जीने से हटाती है, अपनों से हटाती है । आपकी योग्यताओं से हटाती है । आपको अपने आपसे हटाती है ।
इसलिए जीवन ईश्वर, अल्लाह, God का तोहफा है, उसे व्यर्थ नष्ट ना करें । अपनों के साथ, स्वयं के साथ, दोस्तों के साथ पूर्णता से, खुशी से जिएँ और देखिये चमत्कार, कैसे आपके जीवन में चार चाँद लग जाएँगे । आपके बिखरते जीवन में खुशहाली छाएगी । निरंतर पुरुषार्थ करते रहिये, बिना हारे, बिना थके ।
Be brave, be happy
इच्छाओं के पीछे, सम्मान के पीछे मत दौड़िए । इच्छाओं को, सम्मान को आपके पीछे दौड़ने दीजिये, तो जीने का आनंद आपके जीवन में अनोखा होगा ।
चाह गयी चिंता गयी, मनवा बेपरवाह ।
जिसको कछु ना चाहिए, वो शाहन के शाह ।।
७) हर मनुष्य के आसपास और उसके भीतर +ve और –ve दोनों विचार होते हैं । वातावरण इन्हीं विचारों से सकारात्मक और नकारात्मक बन जाता है । जब ‘नहीं हो रहा’, ‘नहीं’ शब्द को हम अपनी बुद्धि, मन से ज्यादा स्थान देते हैं, तो हमारा चित्त नकारात्मक बनने लग जाता है और मन खिन्न, उदास रहने लगता है । कहीं मन नहीं लगता । कुछ चाह रहती है, पर उसे पाने का रास्ता नहीं सूझता । तब खिन्नता, उदासीनता के कारण नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे डिप्रेशन कहते हैं । वास्तविकता में डिप्रेशन शब्द को इतना heavy बना दिया है कि उसे सुनते ही लोग दु:खी हो जाते हैं । परंतु अपने –ve विचारों को हटाकर +ve विचार ज्यादा रखने से, प्रकृति के बीच, हरियाली के बीच, परिवार के संग रहने से –ve प्रभाव नष्ट भी हो जाता है । वह बहुत समय नहीं टिक पाता ।
अगर आपको परिवार के लोग भी समझ नहीं पा रहे, तो आप अपने मित्रों के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान करें । जहाँ तक हो सके, जिनके परिवार में कोई भी सदस्य –ve हो रहा है या डिप्रेस है, तो परिवार के अन्य सदस्य इस स्थिति को ज्यादा गंभीरता से लें और उस व्यक्ति को हल्का महसूस हो ऐसा ही वातावरण बनाएँ । उसे नया जीवन जीने की प्रेरणा व बल प्रदान करें । हँसाते रहें, स्वयं भी हँसते, मुस्कुराते रहें ताकि घर का पारिवारिक वातावरण डिप्रेस व्यक्ति को सकारात्मकता का बल देता रहे । जितना हो सके उन्हें अकेले ना छोड़ें, सदैव साथ रहें । परंतु हाँ उन्हें उनकी इस कमजोरी का, कि आपको उनके साथ रहना पड़ रहा है, ऐसा महसूस न करवाएँ ।
नित्य प्रसन्न रहें, मस्त रहें, आनंदित रहें । मुझे आशा है कि यह सुझाव आपके जीवन को सही दिशा प्रदान करेंगे ।
- आनंदमयी