International Yoga Day: योगी बनें, योगी बनाएँ, योग फैलाएँ
विज्ञान कहता है प्रयोग करो, योग कहता है अनुभव करो । दोनों एक ही बात है । जैसे हर धर्म का व्यक्ति वैज्ञानिक हो सकता है ठीक उसी प्रकार हर धर्म, मत – पंथ – संप्रदाय का व्यक्ति योगी हो सकता है । चाहे हिन्दू हो या मुसलमान, जैन हो या ईसाई, पारसी हो या यहूदी [...]
English Quote – June 17, 2021
अभिव्यक्ति पानी की तरह होती है । बहती है और आजाद होती है । हद का केवल भ्रम है, यह निर्बाध होती है । Expression is like water. It flows and is free. Limit is only an illusion, it is uninterrupted.
Quote – June 17, 2021
सद्गुरु के साथ समर्पण के स्तर का रिलेशन, आचार - विचार में उनका रेस्ट्रिक्शन, जीवन में उनका रिफ्लेक्शन, अगर आत्मसात हो जाए तो, सद्गुरु के प्रभाव से, सद्गति-सिद्धिगति का रिजर्वेशन अवश्य हो जाता है।
Quote – June 16, 2021
आप कहीं भी रहो, आपकी श्रद्धा, आपका विश्वास ईश्वर के, धर्म के प्रति, अध्यात्म के प्रति आपका झुकाव आपको संकटों से अभिरक्षित करेगा। ईश्वर की करुणा-कृपा की अभिरक्षा में आपका जीवन आनंदित हो पनपेगा, निःसन्देह, सफल व सार्थक होगा ।
Quote – June 15, 2021
सर्जनात्मकता आपको भूल करने की भी अनुमति देती है। सृजक बनो, भूल हो तो होने दो। भूल करोगे, सीखोगे, आगे बढ़ोगे। भूलें होने से डरने/घबराने की जरूरत नहीं।
Quote – June 14, 2021
स्वयं को पढ़ो, स्वयं को गढ़ो, स्वयं को खोजो, स्वयं को जानो-पहचानो, सोचो स्वयं को, करो अनुभूतियाँ स्वयं की। यही मार्ग है सभी समस्याओं के अंत का।
English Quote – June 13, 2021
प्यार कभी निष्फल नहीं होता, चरित्र कभी हारता नहीं और धैर्य व दृढ़ता से सपने अवश्य सच होते हैं, इस बात पर भरोसा रखें । Love never fails, character never loses, and trust that with patience and perseverance dreams do come true.
Quote – June 13, 2021
दुनिया की सबसे अच्छी किताब हम स्वयं हैं। अनुभव सबसे बड़ा गुरु है। दुनिया का सब कुछ पढ़ लेने के बाद, स्वयं को पढ़ना-जानना कहीं बाकी न रह जाए.. ये देखना ।
Quote – June 12, 2021
जो सबमें अपनी आत्मा का दर्शन करता है वही वास्तव में देखता है। इसलिए किसी को चोट मत पहुंचाओ। मधुर बोलो, मीठा बोलो, सबसे सद्भाव रखो, सबकी सेवा करो, शुभ चिंतन करो।
Quote – June 11, 2021
पवित्र-एकाग्र मन मे अद्भुत शक्तियां आती हैं और यह पवित्रता-एकाग्रता आती है- ध्यान से, परमात्म चिंतन से। इसलिए तन के आहार से भी मन के आहार की, परमात्म-चिंतन की अधिक आवश्यकता है।