श्राद्ध पक्ष विशेष साँई संदेश !
मैं श्राद्ध पक्ष के इस पावन दिनों में हम सभी को पितृओं का आशीर्वाद मिलें ऐसी कामना करता हूँ । श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन ( भादों पूर्णिमा से भादों अमावस्या तक ) पितृगण सुक्ष्मरूप से पृथ्वी पर विचरण करने आते हैं और उनके वंशजों द्वारा अर्पित किए गए भोज्य पदार्थों को व जल को ग्रहण करते हैं । संतुष्ट हुए पितृगण हमारा मंगल करें ।
कुर्वीत रसयमे श्राद्धं कुले कश्चिन्न सीदति ।
आयुः पुत्रान्यशः स्वर्ग कीर्तिं पुष्टिं बलं क्षियम् । ।
पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात् ।
देवकार्यादपि सदा पितृकार्य विशिष्यते । ।
देवताभ्यः पितृणां हि पूर्वमाख्यायनं शुभम् ।
समय अनुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता । पितरों की पूजा करने से मनुष्य आयु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पोषण, शक्ति, लक्ष्मी, पशुधन, सुख तथा धन-धान्य प्राप्त करता है । देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है ।
देवताओं से पहले ( देवों से पूर्व ) पितरों को प्रसन्न करना अधिक ( ज्यादा ) कल्याणकारी है ।
– गरुड़ पुराण ( 10 – 57 – 59 )
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