उठाओ, कलम और लिखना शुरू करो… !
उठाओ, कलम और लिखना शुरू करो… !
ब्रिटेन में राइटिंग हैबिट – लिखने की आदत के बारे में एक संशोधन हुआ कि प्रतिदिन 5 से 20 मिनट तक लिखने से जीवन में बहुत बदलाव आता है ।
पहले के जमाने में लोग दैनंदिनी लिखते थे, हिसाब-किताब भी हाथों से लिखते, पर आजकल डिजिटल डिवाइस – इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने लोगों की लाइफ स्टाइल को बदल दिया है । लोगों की पैटर्न बदल रही है । इंसान के बिहेवियर के बारे में हुए रिसर्च में ये सामने आया है कि लोग अब हाथ से लिखना भूल रहे हैं । लोगों को कीपैड की आदत पड़ती जा रही है । लोग पेन (कलम) केवल हस्ताक्षर करने के लिए ही रखने लगे हैं ।
कई दोस्त, मित्र ऐसे भी मिलेंगे, जिन्होंने एक-दूसरे के हाथों लिखे अक्षर भी कभी देखे-पढ़े नहीं होंगे ।
आजकल अपने हाथों से लिखना लोग टालते हैं, परंतु इंसान जब पीड़ा, वेदना, तनाव, दर्द में होता है, तब अगर उस दर्द को, पीड़ा को किसी नोटबुक या डायरी में लिख दे, तो वेदना कम हो जाती है । हल्कापन महसूस होता है । गुस्सा, हताशा, उदासी, नाराजगी को उड़ेल दो कागज पर ! लिखने की आदत डालो ! थिंकिंग पैटर्न बदलो !
सोचो, और कोई घटना, कोई परिस्थिति का बोध, कोई अनुभव, कोई प्रेरक विचार… लिखो – अपने लिए, अपनों के लिए ! उन्हें पत्र भेजो । उनके पत्र प्राप्त करो ! संवेदनाओं का आदान-प्रदान करो ! संबंध मजबूत होंगे । तो करिए, आज-अभी से यह प्रयास !
उठाओ, कलम और लिखना शुरू करो… ! सोचने, लिखने में मोबाइल डिस्टर्ब करे, तो बंद कर दो थोड़ी देर !
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