शरद पूर्णिमा पर नारायण साँईं का संदेश... आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई देता हूँ । नवरात्र व दशहरा (विजयादशमी) के बाद अब दीपावली के प्रकाश पर्व की बेसब्री से प्रतीक्षा हो रही है । शरद पूर्णिमा के बाद तोड़े गए आँवलों का महत्व है और इन आँवलों से बना च्यवनप्राश बहुत गुणकारी [...]
शरद पूर्णिमा की खीर : एक अमृतमय औषधि ! शरद पूर्णिमा की शीतल रात्रि में छत पर चंद्रमा की किरणों में महीन कपडे. से ढक कर रखी हुई खीर अवश्य खानी चाहीए। भरपेट ना खाएं रात होने के कारण कम खाएं, सावधानी बरतें। यह चंद्रमा की किरणों में ढाई-तीन घंटे (९-१२ बजे) रखी हुई खीर [...]
जीवन में बार-बार असफलता मिलने पर क्या करें ? तुम्हारे विचार ठीक हो, तुम्हारी दृष्टि स्पष्ट हो, तो सफलता तो तुम्हारे चरणों की दासी है । मायूस न हो, इरादे न बदल, तकदीर किसी वक्त भी बदल सकती है । दस बार तुमने हानि उठाई, तो यह जरूरी नहीं है कि ग्यारहवीं बार भी तुमको [...]
अब आ जाओ साँईं प्यारे...! एक-एक घड़ी याद है तुम्हारी, दरस दिखाओ नुरानी नजर तुम्हारी, साँईं तुम ही प्राण हो हमारे, तुम ही हो रक्षणहार हमारे, तुम बिन कैसा जीना हमारा, कैसा है निर्लेप जीवन तुम्हारा, तुम बिन ये काया मृत है हमारी, तुम ही हो अंदर की श्वास हमारी, आप नहीं तो कुछ भी [...]
आप कोई ऐसी पहल कीजिये, जो समाज के लिए, देश के लिए हितकारी हो ! वाकई सराहनीय हो । मैं चाहता हूँ हम सबकी शक्ति और हमारा सामर्थ्य समाज के, देश के हर तबके के लोगों के हित में लगे ! जनहित ही हमारा लक्ष्य हो । कोई भी विकास की पहल जो देर-सबेर हितकारी [...]
चाहे कहो ब्रह्मचारिणी या स्कंदमाता, महागौरी या कहो सिद्धिदात्री, माँ आदिशक्ति के स्वरूप में चरितार्थ होती है नारी शक्ति । नवरात्रि की आराधना में हूबहू प्रतीत है स्त्रीत्व का शुभ साक्षात्कार ! जिसमें माँ अंबा विभिन्न रूपों में व्याप्त है सम्पूर्ण सृष्टि में ! हर नर-नारी पूजे शक्ति को, स्वयं में करें शक्ति का संचार [...]
शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि समस्त ब्रह्मांड में मोक्षलोक भूलोक माना गया है और भूलोक में भारत वर्ष, भारत वर्ष में भी सनातन धर्म । सनातन धर्म में छ रूपों में परमेश्वर की आराधना-उपासना होती है । जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य के अनुसार शिव, शक्ति, गणेश, सूर्य, विष्णु तथा निराकार ब्रह्म । वेद, पुराण, रामायण, [...]
क्या आप अपने जीवन की सही दिशा जानते हैं ? सत्संग करो मिल भाई, छोड़ो जग की चतुराई । चुन-चुनकर ईंटे और पत्थर ऊँचे मंजिल वास किया, हरि भजन का समय अमोलक, उसका सत्यानाश किया, निर्बल और गरीबों की कछु करी नहीं सुनवाई | सत्संग करो मिल भाई, छोड़ो जग की चतुराई । कितनी कला [...]
दूर रहकर भी दिल से दिल का जुड़ाव हो सकता है ! जिंदगी मीठी प्यास है, अपने-अपने ढंग से सब बुझाते हैं । माता-पिता की प्यास अपने बच्चों को देखकर ही तृप्ति में बदल जाती है । आजकल ज्यादातर माता-पिता इस बात से परेशान हैं कि बच्चे दूर चले गए और जाकर हमें भूल गए [...]
Wabi - Sabi का तत्वज्ञान दूर करेगा अवसाद-भय-चिंता से... ! ■ डिप्रेशन और तनाव का मूल कारण :- दुनिया के मापदंड के अनुसार जो प्राप्त नहीं हुआ, उस स्थिति का स्वीकार करने से इन्कार । ■ तीन बड़ी चुनौतियाँ :- वर्तमान स्थिति से तनावपूर्ण रहना, परिवर्तन का डर सताना और अपूर्ण होने का रंज । [...]
अपना मुखड़ा देखने के बावजूद लोग अपने को कहाँ देख पाते हैं ? मैं तो स्वयं का दर्शन करने हर रोज ध्यानस्थ होता हूँ, आज ध्यान शरीर के मुखड़े पर गया... और स्वयं को ही देख मुस्कुरा गया... अपने आपको देखने का भी तो मजा है... अपने आपका आकर्षण भला किसको नहीं होता ? सेल्फी [...]
पितृदोष दूर करने के लिए जरूरी हैं ये उपाय सूर्य ग्रह को पिता तुल्य माना गया है । जबकि राहु एक छाया ग्रह है । जब यह सूर्य से मिल जाता है तो सूर्य को ग्रहण लग जाता है । इसी प्रकार, जब जन्म कुंडली में सूर्य-चंद्र और राहु एक घर या स्थान में युति [...]
मैं श्राद्ध पक्ष के इस पावन दिनों में हम सभी को पितृओं का आशीर्वाद मिलें ऐसी कामना करता हूँ । श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन ( भादों पूर्णिमा से भादों अमावस्या तक ) पितृगण सुक्ष्मरूप से पृथ्वी पर विचरण करने आते हैं और उनके वंशजों द्वारा अर्पित किए गए भोज्य पदार्थों को व जल को [...]
श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरों की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे 'श्राद्ध' कहते हैं। हमारे जिन संबंधियों का देहावसान हो गया है, जिनको दूसरा शरीर नहीं मिला है वे पितृलोक में अथवा इधर-उधर विचरण करते हैं, उनके लिए पिण्डदान किया जाता है। विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो [...]
आध्यात्मिक जीवन जीने का अर्थ है - अच्छा होना, ईमानदार होना तथा शांतिपूर्ण होना । अपने आचरण में प्रेम का होना, प्रकाश का होना । सभी की देखभाल करना । सम्पूर्ण जीवन, प्रकृति तथा सभी चीजों का आदर करना, क्योंकि सभी में वही चेतना है, जो हममें है । आध्यात्मिकता का अर्थ है आजादी से [...]