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जन्माष्टमी पर ‘ओहम्मो’ का संदेश

जय श्री कृष्ण… जय गिरधारी…
नंद घर आनंद भयो जै कन्हैया लाल की !
हाथी घोड़ा पालकी जै कन्हैया लाल की… जन्माष्टमी के अवसर पर आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ ! कृष्ण को समझाना बहुत सरल है परंतु समझना मुश्किल है । बहुमुखी प्रतिभा से भरपूर है कृष्ण का व्यक्तित्व । डाकोर में वे राजा रणछोड़ हैं, द्वारका में द्वारकाधीश हैं, श्यामल में वे सबके शामलिया हैं, तो श्रीनाथजी में वे सबके नाथ हैं, वृंदावन में वे बांके बिहारी हैं, तो नंद राजा के घर वे कान्हा हैं, देवकी जी का दुलारा है वे, तो वासुदेव के पुत्र स्वरुप में वे वासुदेव हैं । श्रीमद्भगवद्गीता मे वे साक्षात भगवान हैं । ब्रजवासियों के लिए वे गोपाल हैं, बांके बिहारी लाल हैं । बच्चों के वह लाला है, योगियों के वे योगेश्वर हैं । वे गोवर्धनधारी हैं, राधा रमण है, वे गोपीजन वल्लभ है । वे आनंदकंद हैं । वे मधुराधिपति हैं, वे बंसीधर हैं, अब तो कह देने दो कि वे पूर्ण पुरुषोत्तम है । मधुसूदन हैं, जगद्गुरु है, कलाधारी हैं, ऐसे लीलाधर केशव के अवतरण दिवस जन्माष्टमी की आपको ढेर सारी बधाइयाँ… हार्दिक मधुर स्नेहसिक्त ह्रदय से बहुत-बहुत शुभकामनायें । सांदीपनि ऋषि के आश्रम में वे सुदामा के लंगोटिया मित्र थे । कुरुक्षेत्र के रण मैदान में वे सखा – शिष्य अर्जुन के सारथी थे, गोपियों के लिए वे माखन चोर थे, राधा के लिए वे चित के चोर थे, वे कालिया नाग को नाथने वाले थे, द्रौपदी के वे खास अंगद सखा थे । वे बलभद्र जी के अनुज थे और आठ – आठ पटरानियों के स्वामीनाथ थे । वे उत्तम योद्धा, राजनीतिज्ञ,बंसी – बजैया, ज्ञानी, चिंतक, गीता उपदेशक और रासलीला के उत्तम खेलैया भी थे । ऐसे गोविंद माधव के अवतरण दिवस जन्माष्टमी की आपको फिर से बधाई देता हूँ ।

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