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पूज्य श्री नारायण साँईं “ओहम्मो” का दीपावली,नूतन वर्ष एवं भाई दूज 2018 निमित्त विशेष संदेश…

बड़े लंबे समय के बाद आपको पत्र लिख रहा हूँ । मेरे प्यारे, देश-विदेश में फैले हुए मेरे समर्थकों, साधक-भक्तजनों को दीपावली, नववर्ष, भाईदूज की हार्दिक शुभकामनाएं ।
शत्रु का लोहा भले ही गर्म हो जाए पर हथौड़ा तो ठंडा रहकर ही काम दे सकता है ।
छोड़ो आवेश, छोड़ो आक्रोश और ठंडे दिमाग से काम करो । ये सूत्र जीवनभर याद रखना है और इसे अधिक से अधिक अपने जीवन में उतारना है ।
अपना परिवार हो या समाज, राजनीति हो या फिर कोई परिवार की, समाज की, देश की समस्या – इस मंत्र से मुझे विश्वास है कि हम हर दिक्कतों को पार कर पायेंगे ।
मैं इन दिनों जेल की हार्डकोर में हूँ । ये जेल के अंदर भी एक जेल है । जैसे जेल के बाहर रहनेवालों को मुझसे मिलने में कठिनाई है वैसे ही जेल में रहनेवाले भी मुझे आसानी से नहीं मिल सकते । उस हार्डकोर से बाहर तभी आना होता है जब आप मुलाकात लेते हो या वकील मिलने आता है या फिर कोर्ट की तारीख होती है ।
मजे की बात है कि भरपूर एकांत का आनंद ले रहा हूँ । एकांतिक सुख की प्राप्ति हो रही है ।
ये सोचकर निराश मत होना कि बापूजी हमारे बीच नहीं है । हाँ, उनका साकार स्वरूप बीच में नहीं पर तत्वरूप से वे हम सबके साथ हैं, पास हैं और हमें ऊर्जा, हिम्मत, ताकत दे रहे है ।
बंधन कहाँ नहीं है ? जेल में तो बंधन है ही, जेल के बाहर भी तो बंधन है – इच्छाओं का बंधन, शरीर का बंधन, किसी न किसी रूप में बंधन ने सबको पकड़कर रखा है और आप हम स्वयं को जान पाए और अनुभव कर पाए तो बंधनों में होने के बावजूद हम मुक्त है क्योंकि हमारा स्वभाव ही मुक्त है । हम मुक्तात्मा है ।
मैं स्वयं को कभी बंधन में मानने की गलती नहीं करता क्योंकि ये समझ है, ज्ञान है कि जो शरीर के बंधन को खुद का बंधन मानने की गलतफहमी नहीं होने देती । अतः
मुक्तोsहम्, मैं मुक्त हूँ,
शाश्वतोsहम्, मैं शाश्वत हूँ,
प्रकाशोsहम्, मैं प्रकाश रूप हूँ,
दुःखरहितोsहम्, मैं दुःखरहित हूँ
स्वयं को आत्मरूप, मुक्तात्मा मानो और अनुभव करो । परमानंद में मस्त रहो यही नववर्ष का शुभ संदेश है । दीपावली में मेरे दिल की बात है ।
हम अपने आंनद के लिए और पर्यावरण की, समाज की चिंता नहीं करते और पटाखे जलाकर वातावरण प्रदूषित करते है तो ऐसा सुख देर-सवेर सबके लिए हानिकारक होगा ।
तो प्रदूषण किए बिना का – वातावरण को, पर्यावरण को बिगाड़े बिना, किसी को हानि पहुँचाए बिना, हिंसा किए बिना – सभी के मंगल का सोचते हुए हम उत्सव मनाएँ, आनंद मनाएँ ।
हमारा आनंद, सुख तो समाज के, प्रकृति के, हवामान के पर्यावरण के लिए नुकसानदायक न हो इस रीति-नीति, पद्धति से दीपावली, नववर्ष मनाएँ । हर उत्सव मनाने के पीछे यह विचार पहले हो ।
आप सभी को फिर से प्रकाश पर्व की बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं । सार्थक दीपावली मनाएँ ।
जब मैंने पढ़ा कि अरब देश के यमन में भूखमरी से लोगों की मौतें हो रही है तो हृदय को बड़ी पीड़ा हुई । युद्ध-हिंसा से किसी का भला न आजतक हुआ है न हो सकता है और ना ही होगा । दुनिया के शासकों को कब समझ मे आयेगी ! वहाँ की भूखमरी, हिंसा को रोकने के लिए हम भारतवासी क्या कर सकते हैं हमें सोचना होगा । भारत सरकार ‘वसुदेव कुटुम्बकम्’ की विचारधारा को आत्मसात् करते हुए इस मामले में पहल करे तो मुझे बेहद खुशी होगी ।
हमें दूसरों का दुःख अपना दुःख और दूसरों का सुख अपना सुख मानना होगा और यह दृष्टिकोण विकसित करना होगा ।
दूसरा पत्र जल्दी लिखूँगा – मैं जानता हूँ कि आप मेरे पत्रों की प्रतिक्षा करते है ।
अभी इतना ही ।
व्हाट्सप, फेसबुक आदि के माध्यम से इस पत्र को फैलाना ताकि सदविचार फैलें और दूसरों का दुःख दूर करने की भावना विकसित हो ।
आपका अपना –
नारायण साँई ‘ओहम्मो’
7/11/2018, 4:00 PM

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