आइये एक नई परंपरा अपनाएँ,
अपने घर इको-फ्रेंडली गणेश लाएँ
– पूज्य श्री नारायण साँईं जी
गणेश उत्सव की परंपरा में,
पर्यावरण के दृष्टिकोण को शामिल करें…
कुदरत को संभाले, कुदरत हमें संभाले ।
POP में से बनी हुई मूर्तियाँ जलाशयों को प्रदूषित करती हैं । तो आईये, इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर मिट्टी की अथवा पेपर के गणेशजी की मूर्ति स्थापित करके घर में ही गणेश विसर्जन की एक नई परंपरा का श्री गणेश करें ।
पर्यावरण को हानि न पहुँचे इस उद्देश्य से सुरत के कई सोसायटियों में उपयोग में न आनेवाले पेपरों से 3 फूट के गणेशजी की मूर्ति की स्थापना की गई थी । पेपर की मूर्ति की विधिवत् पूजा-आरती करके सोसायटी की वाड़ी में खड्डा खोदकर उसमें पानी भरकर गणेशजी की मूर्ति का विसर्जन किया गया ।
घर में किसी मिट्टी के गमले या किसी पात्र में गणेशजी की मूर्ति को विसर्जित करके उस मिट्टी को बगीचे में डाल दें अथवा तो सोसायटी की वाड़ी में खड्डा खोदकर उसमें पानी भरकर गणेशजी की मूर्ति का विसर्जन भी किया जा सकता है ।
इस परंपरा से आपकी श्रद्धा भी बनी रहेगी और जलाशयों का जल स्तर भी कम होने से बच जायेगा ।
इको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति का महत्त्व :
- गणेशजी की यह पवित्र मूर्ति गाय के गोबर, लाल मिट्टी एवं गंगाजल के मिश्रण से तैयार की गई है ।
- इको-फ्रेंडली मूर्ति की शुद्धता हमारे चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा बनाने में मदद करती है और शुद्ध उत्पादों से बने भगवान की मूर्ति के आगे प्रार्थना करने से भगवान के आशीर्वाद भी प्रदान करती है ।
- मूर्ति के साथ ही स्थापना किट प्रदान की जा रही है, जिसमें पूजा की सभी सामग्री उपलब्ध है, जो गणेश स्थापना के दौरान आवश्यक होती हैं ।
- साथ ही गणेशजी की आरती एवं नामावली की सीडी भी उपलब्ध है ।
- आखरी और सबसे महत्त्वपूर्ण बात, मूर्ति विसर्जन के समय पूरी तरह से घुल जाती है और नदी या समुद्र के पानी को अशुद्ध करने के बजाय शुद्ध बनाती है ।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियाँ पानी में नहीं घुलती । अतः उन मूर्तियों से पर्यावरण को हानि पहुँचती है और भगवान का अपमान भी होता है ।