अपने स्वरूप का बोध, अपनी आत्मा का साक्षात्कार -जीवत्व हट गया, अहंता हट गयी, ममता हट गयी, जन्म-जन्मांतरों में भटकानेवाले जो संस्कार थे, वो हट गए और गुरुकृपा से बोध हो गया । अपनी आत्मा का बोध हो गया। यह पुण्यमय, पवित्र साधकों के लिए प्रेरणादायी और उत्सव मनानेवाला दिवस हैं आत्मसाक्षात्कार दिवस । देश और विदेश में लाखों-करोड़ो साधक-भक्त अपने गुरुदेव का यह आत्मसाक्षात्कार दिवस बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। संकीर्तन यात्राएँ निकलती हैं, भंडारों का आयोजन होता है, बाल भोज होता है, अस्पतालों में निःशुल्क दवाईयाँ, फल आदि वितरित किये जाते हैं। जैसे हमारे गुरुदेव अपने स्वरूप में जगे, ऐसे हम भी अपने स्वरूप में कब जगेंगे ? उस दिन का साधक इंतजार करते हैं।