कभी-कभी मनुष्य दूसरों पर आज्ञा चलाने के बलाधिकार सुख में सामनेवाले का उत्तर सुनने व उसके हृदय को समझने की योग्यता तक खो बैठता है । सामनेवाले को हमारी बात मानने की लाचारी हमारे अभिमान को बढ़ाती है यह आत्म निरीक्षण करने पर मालूम होती है । – पूज्य श्री नारायण साँई जी