तुम्हारा और मेरा नित्य संबंध है, था और रहेगा इसमें कोई संशय नहीं है। कोई इसे मिटा भी नहीं सकता क्योंकि हमारे अस्तित्व से ही जगत का अस्तित्व है। मैं प्रकाशक जगत प्रकाश्य, मैं द्रष्टा जगत दृश्य।
कई महिलाओं ने , नारियों ने अपने हौसले को बुलंद रखकर विपरीत और कठिन परिस्थितियों में अपनी उन्नति की और कठिन सफ़र को तय किया !! ये वे महिलाएँ हैं जिनको देखकर अन्य महिलाएँ प्रेरणा लेती हैं ।
उठो! उठो!! उठो!!! अपने स्वरुप में डेरा लगाओ और विराट स्वरुप के सिंहासन पर आरूढ़ हो जाओ, फिर आपके केवल एक संकेत से ही संसार के सारे कार्य पूरे होते चले जाएंगे।
आप अपने को कभी छोड़ नहीं सकते और पर को कभी रख नहीं सकते जिसको आप छोड़ नहीं सकते हैं उसका नाम है आत्मा-परमात्मा और जिसे आप रख नहीं सकते हैं उसका नाम है माया,प्रकृति,प्रतीति। तो जिसे आप छोड़ नहीं सकते उस का ज्ञान पा लो और जिसे रख नहीं सकते उससे ममता हटा लो, [...]
यदि शास्त्रों का वेत्ता भी हो और सर्वधर्म से पूर्ण हो तो भी यदि वासना से मुक्त नहीं हुआ तो बंधन में बंधा ही है। जिस पुरुष ने आत्म चिंतन का अभ्यास किया है और उससे ज्ञान रूपी अग्नि उपजाकर वासना के बीज को जलाया है,उसको फिर संसार-भ्रम नहीं होता ।
जगत प्रतीत ही नहीं होना चाहिए । निर्वासनिक होगा तो दुःख क्यों मिलेगा ? (This world should not be perceived at all. When the being gets free of every desire then why would any pain impact at all?)