आइए ध्वनि प्रदूषण से होने वाले नुकसान को जानते हैं ?

ध्वनि की सीमा कब और कहाँ पार हो रही है, इसकी तत्काल जानकारी प्राप्त करने के लिए सरकार 144 नए मॉनिटरिंग स्टेशनों की स्थापना कर रही है

हॉर्न एक ऐसा उपकरण है जो मोटर, वाहनों, ट्रेनों, नावों और अन्य प्रकार के वाहनों पर लगाया जाता है और ध्वनि उत्पन्न करता है । यह जो ध्वनि करता है वह सामान्यतः ‘हॉन्क’ ( पुराने वाहन ) या ‘बीप’ (आधुनिक वाहन) जैसी होती है । चालक वाहन की उपस्थिति या उसके आने के बारे में अन्य लोगों को चेतावनी देने या खतरे की ओर उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए हॉर्न का उपयोग करता है ।

ध्वनि का मापन और उसके प्रभाव

ध्वनि या शोर हवा के माध्यम से फैलता या प्रसारित होता है । ध्वनि की मात्रा को डेसिबल में मापा जाता है । विशेषज्ञों के मत के अनुसार 90 डेसिबल से अधिक के लगातार शोर से सुनने की शक्ति स्थायी रूप से खो सकती है या हमारी तंत्रिका प्रणाली को घातक नुकसान हो सकता है । विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) द्वारा शहरों में सुरक्षित ध्वनि का मानक 45 डेसिबल निर्धारित किया गया है ।

मानव जाति के सामने अनेक गंभीर चुनौतियों की तरह सार्वत्रिक प्रदूषण भी एक बड़ी चुनौती है । पिछली सदियों में विज्ञान का अत्यधिक विकास हुआ और दुनिया में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई । जगह-जगह मिलें और कारखाने स्थापित हुए । रेलगाड़ियाँ और अन्य वाहन तेजी से दौड़ने लगे । नए औद्योगिक इकाइयाँ और बस्तियाँ स्थापित हुईं । शहरों में आवास की समस्या ने गंदी और भीड़भाड़ वाली झुग्गी-झोपड़ियों को जन्म दिया । यांत्रिकी के इस उत्कर्ष ने एक ओर मानव को चंद्रमा की सतह तक पहुँचा दिया, तो दूसरी ओर उसने मानव जाति के सामने प्रदूषण का घातक खतरा भी खड़ा कर दिया ।

प्रदूषण के विभिन्न प्रकार

आज जो हवा हम साँस में लेते हैं वह प्रदूषित है । कारखानों की जहरीली गैसें वातावरण को लगातार प्रदूषित करती हैं । डीजल या पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआँ हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ाता है । गंदगी से भरी शहरों की नालियों की दुर्गंध हवा में मिल जाती है । रासायनिक कारखानों से समय-समय पर निकलने वाली जहरीली गैसें वातावरण को प्रदूषित बना देती हैं । महाशक्तियों द्वारा किए जाने वाले परमाणु विस्फोटों के प्रयोग वातावरण में असंतुलन उत्पन्न कर उसे घातक बना देते हैं ।
सड़कें बनाने के लिए पेड़ों और वनों का अंधाधुंध विनाश भी वायु प्रदूषण का कारण बनता है । वायु प्रदूषण पर्यावरण को बिगाड़ता है, आँखों के रोग, फ्लू, खांसी और श्वास संबंधी रोग उत्पन्न करता है । रेडियो, टीवी की आवाजें और त्योहारों के दौरान होने वाले लाउडस्पीकरों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

आधुनिक हॉर्न की कार्यप्रणाली

आधुनिक कारों के हॉर्न सामान्यतः इलेक्ट्रिक होते हैं, जो सपाट गोलाकार स्टील डायाफ्राम द्वारा संचालित होते हैं । यह व्यवस्था सर्किट को प्रति सेकंड सैकड़ों बार खोलती और बंद करती है, जिससे बजर जैसा तेज आवाज उत्पन्न होती है । सामान्य कार हॉर्न का ध्वनि स्तर लगभग 107-109 डेसिबल होता है, और यह सामान्यतः 5-6 एम्पियर विद्युत धारा खींचता है ।

ट्रक और बसों में पाए जाने वाले बड़े एयर हॉर्न एयर कंप्रेसर द्वारा संचालित होते हैं । दुनिया भर में अधिकांश शोर का स्रोत परिवहन व्यवस्था है, जिसमें विमान ( एयरक्राफ्ट शोर ) और रेल शोर भी शामिल हैं ।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव

अप्रिय और कर्कश ध्वनि का हमारे शरीर पर सीधा प्रभाव सुनने की शक्ति का नुकसान, हृदय रोग, चिंता, मानसिक तनाव और नींद में बाधा के रूप में होता है । मानसिक प्रभावों में एकाग्रता की कमी, स्मरण शक्ति का ह्रास तथा बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव शामिल है । इसके अतिरिक्त सिरदर्द, अनिद्रा तथा पाचन शक्ति की कमी के लिए भी ध्वनि प्रदूषण जिम्मेदार है ।

प्राणियों पर भी शोर का घातक प्रभाव पड़ सकता है । इसके कारण वे तनाव में रहते हैं, जिससे शिकार और प्रजनन की प्रक्रिया प्रभावित होती है । ध्वनि के अत्यधिक संपर्क से प्राणियों में स्थायी बहरेपन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और संकटग्रस्त प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं ।

डॉ. शैलेश ब्रह्मभट्ट

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