स्वयं का दर्शन !

स्वयं का दर्शन !

अपना मुखड़ा देखने के बावजूद लोग अपने को कहाँ देख पाते हैं ? मैं तो स्वयं का दर्शन करने हर रोज ध्यानस्थ होता हूँ, आज ध्यान शरीर के मुखड़े पर गया… और स्वयं को ही देख मुस्कुरा गया…

अपने आपको देखने का भी तो मजा है… अपने आपका आकर्षण भला किसको नहीं होता ? सेल्फी का क्रेज जाने-अनजाने अपने को देखने व फैलाने का क्रेज ही है । मनुष्य स्वयं को देखना और दिखाना पसंद करता है । सुंदर दिखने और दिखाने के लिए विश्व में करोड़ो लोग, करोड़ो-अरबों रूपये खर्च करते हैं, पर मजा तो तब है कि जब हम अपने असली स्वरूप को देखें… तो वाह ! क्या बात है ! कह उठेंगे उस फकीर की तरह जिसने अपने असली स्वरूप की झाँकी पाई और कह उठा था : 

देखा अपने आपको मेरा दिल दीवाना हो गया,

ना छेड़ो मुझे यारों ! मैं खुद पे मस्ताना हो गया !

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