पूज्य साँईंजी की बोधप्रद वाणी सतत सावधानी ही साधना है । असावधानी और लापरवाही असफलता का कारण है । चाहे कोई भी कार्य करो, उसमें सावधानी आवश्यक है । असावधान मछली काँटे में फँस जाती है, असावधान साँप मारा जाता है, असावधान हिरण शेर के मुख में चला जाता है, असावधान वाहन चालक दुर्घटना कर [...]
उत्तम दृष्टिकोण धारण करें ! (पूज्य साँईंजी द्वारा विरचित ‘उत्तम दृष्टिकोण’ नामक सत्-साहित्य से संकलित) दुःख में उद्वेग न हो । सुख में स्पृहा न हो । मान-अपमान में समता रहे । धन-संपत्ति सदा टिकती नहीं है, आने-जानेवाली है । शरीर-मन-समय-संसार परिवर्तनशील है । सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख आने-जानेवाले हैं । ये समझकर उत्तम दृष्टिकोण अपनाकर सदा [...]
बस प्रयत्न करो… प्रयत्न करो… और प्रयत्न करो… करते ही रहो… सफलता मिलेगी मिलेगी और मिलेगी ही… अपना काम सिर्फ प्रयत्न करना ही है । फल और परिणाम की चिंता छोड़कर । जब परिणाम अपनी मर्जी के अनुसार मिलनेवाला ही नहीं है तो उसकी चिंता, फिक्र करने से क्या लाभ ! इसीलिये प्रयत्न करो… और [...]
किसी भी मनुष्य की जिंदगी में घटनाओं की एक जंजीर होती है । एक कमजोर कड़ी के बाद एक मजबूत कड़ी आये, ऐसा हो सकता है और ऐसा होता भी है कि हमने जिसे निष्फलता मान लिया, वह बड़ी सफलता की जननी बन जाती है । कमजोर और मजबूत कड़ीयों का कुछ गूढ़ संबंध होता [...]
हमें छोटी-छोटी बातों से ऊपर उठने की जरूरत है । मनुष्य को अपनी कमियों और मर्यादाओं को जीवन जीने के लिए अयोग्यता मानने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है । मनुष्य को अगर पंख मिले होते, तो हो सकता है उसने विमान की खोज कभी की ही नहीं होती । ईश्वर ने मनुष्य को बहुत [...]
धर्मपाल जो कुछ भी छू देता वह सोना बन जाता । आशीर्वाद जैसी कोई चीज़ होती है, है क्या ? अपने पिता के वादे का परीक्षण करने के लिए, धर्मपाल ने अपने जहाज में सामान लादा और उन्हें बेचने के लिए ज़ांज़ीबार बंदरगाह के लिए निकल पड़ा । अगर आशीर्वाद तीव्र और करुणा से भरा [...]
ब्रह्मज्ञानी को पूजे महेश्वर, ब्रह्मज्ञानी आप परमेश्वर । ब्रह्मज्ञानी मुगत-भुगत का दाता, ब्रह्मज्ञानी पूरण पुरुष विधाता । ब्रह्मज्ञानी को खोजे महेश्वर, ब्रह्मज्ञानी आप परमेश्वर । ब्रह्मज्ञानी का कथ्या न जाये आधा अखर, नानक ब्रह्मज्ञानी सबका ठाकुर । जेको जनम मरण ते डरे, साध जना की शरणी पड़े । जेको अपना दुःख मिटावे, साध जना की [...]
गीता ने भी कहा - एकांतवासो लघुभोजनादो मौनं निराशा करणावरोध: । एकांत में रहना चाहिए । सारी वृत्तियाँ उस एक परमात्मा में जहाँ विश्रांति को प्राप्त होती है । वो जो विरक्त महात्मा होते हैं न ! विविक्त देशस्य सेवितवं अरतिर्जन संसति ।जनसमुदाय से दूर जाकर एकांत, अज्ञात में भगवान का भजन करते हैं । [...]
भारतीय इतिहास में एक से बढ़कर एक शिक्षक रहे हैं । श्रीराम से लेकर स्वामी विवेकानंद तक जितने भी युगनायक हुए हैं, उनके पीछे किसी महान गुरु का आशीर्वाद और शिक्षा रही है । शिक्षण पद्धति तो आदिकाल से चली आ रही है तथा हमारे पौराणिक ग्रंथों में गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र मिलता है । [...]
जानिए... स्वयं को ! उतरिए अपने भीतर... देखिए... खुद को... महसूस कीजिए, अपने अस्तित्व को, अपनी क्षमताओं को ! एक चिंगारी में क्या ताकत है... शायद एक तिल्ली को नहीं पता... ! आपमें भी अनंत, असीम ऊर्जा का भंडार भरा है । ये बहिर्मुख होकर नहीं, अंतर्मुख होकर ही पता चलेगा ! खुद के लिए, [...]
रचनात्मक कार्य करने के लिए शांत और स्वस्थ दिमाग (मन) एक बुनियादी आवश्यकता है, क्योंकि सकारात्मक सुझावों को स्वस्थ एवं शांत मन द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है और इससे शरीर को रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है । मन की शक्तियों, इसकी साधना और इसकी सीमाओं पर बुद्धिमान पुरुषों [...]
सिंधी जगत के एक संत हो गए टेऊँराम महाराज । बोलते थे तो वो परमात्मा के साथ एक हो जाते थे । शुध-बुध भूल जाते थे । और बच्चों को उनके साथ बहुत आनंद आता था। बच्चे अपने-अपने घर से निकलकर उनके पास पहुँच जाते थे । तो माता-पिता उनको रोकते थे कि क्या रोज़-रोज़ [...]
गुस्से में कोई काम न करें, वरना गलत ही करेंगे… जो आज का विज्ञान कह रहा, वही बात 16वीं शताब्दी में बलतासार ग्रासियन ने की थी । वे दार्शनिक थे । उन्होंने कहा था - “दोस्ती जीवन में सुख को बढ़ा देती है और दुःख घटा देती है ।” उनके कुछ विचार, सूक्तियों को साझा [...]
वर्तमान को बेहतर बनायें और भविष्य को उज्जवल स्कॉटलैंड देश की एक आध्यात्मिक शिक्षिका व लेखिका है इलीन केडी । बहुत बढ़िया बात कही है उन्होंने । वे कहती हैं – ‘हमेशा याद रखिए कि प्रेम, आनंद और सुख – एक उचित वातावरण को सृजित करता है और समान विचार के लोगों को पास में [...]
पहली तो होती है श्रद्धा । बिना श्रद्धा के... शालिग्राम में श्रद्धा रखनी पड़ती है, भगवान की मूर्ति में भी श्रद्धा रखनी पड़ती है । नास्तिक बोलेगा कि यह मूर्ति थोड़ी है, भगवान थोड़ी है, यह तो पत्थर है । नहीं... नास्तिक के लिए तुलसी पौधा है, फायदा नहीं होगा । गंगा केवल नदी है [...]
शब्दों से परे है प्रेम का एहसास देखो, आपको प्रेम करनेवाले जो भी हैं, यह संभव है कि वे आपका अहित भी कर सकते हैं, और आपकी अवहेलना, तिरस्कार व धिक्कार करनेवाले आपका हित-मंगल-कल्याण भी कर सकते हैं । प्रेम और नफरत करनेवालों के दो अलग गुट नहीं होते । सवाल हार-जीत का नहीं है [...]