Guru Poornima: मैं उनका कृतज्ञ था, हूँ और रहूँगा !

Guru Poornima: मैं उनका कृतज्ञ था, हूँ और रहूँगा !

मैं संपूर्ण आदर और श्रद्धा के साथ मेरे मार्गदर्शक, आचार्य, सद्गुरु को मैं विश्व में जहाँ भी रहूँ, वहीँ से प्रणाम करता हूँ | जो कुछ दोष हैं वे मेरे हैं और जो कुछ भी मेरे जीवन में सद्गुण हैं, अच्छाइयाँ हैं, वो सब उनकी तरफ से मिली हैं | मेरे जीवन की श्रेष्ठता के लिए मैं उसका जितना भी धन्यवाद करूँ, कम है । उनकी करुणा – कृपा, उनकी दी हुई सूझ-बुझ, समझ, ज्ञान… मुझे काम आता रहा है । जब तक जीवन रहेगा, उनका प्रदान किया हुआ ये अखूट खजाना मेरे काम आता रहेगा !

मैं उनका कृतज्ञ था, हूँ और रहूँगा ! हमारा उन्हें शत शत नमन… !

-पूज्य श्री नारायण साँई जी

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