सद्गुरु कृपा की संपत्ति !
बाहर का धन तो जॉब से मिलेगा और बिजनेस से मिलेगा लेकिन जब तक आध्यात्मिक धन जीवन में नहीं आया तो बाहर का धन किस काम का ? हम तो वो खजाना देते हैं जो मौत का बाप भी नहीं लूट सकता । और मीरा कहती है कि पायो मैंने राम रतन धन पायो । खर्चे न खुटे, चोर न लुटे, दिन दिन बढ़त सवायो, पायो मैंने राम रतन धन पायो… तो सद्गुरु कृपा की संपत्ति जैसा खजाना तो पूरे विश्व में नहीं है । ये सद्गुरु कृपा की संपत्ति आप सभी को मिले और उस खजाने से आपका जीवन मालामाल हो जाए ये आकांक्षा है और इसीलिए धन्य है वे मानवरूप में देवता ! कि जिन्होंने समाज और संत के बीच एक कड़ी बनने का काम किया, सेतु बनने का काम किया ।