Sai Sandesh : निन्दा होती है तो उसमें दुःख नहीं होना चाहिये !
Sai Sandesh : निन्दा होती है तो उसमें दुःख नहीं होना चाहिये !
हम पाप नहीं करते किसी को दुःख नहीं देते, फिर भी हमारी निन्दा होती है तो उसमें दुःख नहीं होना चाहिये, परन्तु प्रसन्नता होनी चाहिये । भगवान की तरफ़ से जो होता है, सब मंगलमय ही होता है इसलिये मन के विरुद्ध बात हो जाये तो उसमें आनंद मनाना चाहिये ।